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June, 2008 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वैल्यू एडेड टैक्स

मूल्य वर्धित कर (VAT),यावस्तु और सेवा कर (GST)एकउपभोग कर(CT) है, किसी भी मूल्य पर जो एक उत्पाद में जोड़ी जाती है।बिक्री करके विपरीत, VAT, उत्पादक और अंतिम उपभोक्ता के बीच मार्ग की संख्या के संबंध में तटस्थ है; जहां बिक्री कर प्रत्येक चरण में कुल मूल्य पर लगाया जाता है (हालांकि अमेरिकी और कई अन्य देशों में बिक्री कर सिर्फ अंतिम उपभोक्ता को अंतिम बिक्री पर लगाया जाता है और अंतिम उपयोगकर्ता उपयोग कर, इस तरह वहां थोक या उत्पादन स्तर पर कोई बिक्री कर नहीं दिया जाता), इसका परिणाम एक सोपान है (नीचे के कर ऊपर के करों पर लगाए जाते हैं). VAT एक अप्रत्यक्ष कर है, इस रूप में कि कर को ऐसे किसी से एकत्र किया जाता है जो कर का पूरा खर्च नहीं उठाता. मौरिस लौरे फ्रेंच कर प्राधिकरण के संयुक्त निदेशक, Direction générale des impôts प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने 10 अप्रैल 1954 को VAT पेश किया, हालांकि जर्मन उद्योगपति डॉ॰ विल्हेम वॉन सीमेंस ने 1918 में इस अवधारणा का प्रस्ताव दिया था। शुरू में बड़े पैमाने के कारोबारों पर लक्ष्यित, समय के साथ सभी व्यावसायिक क्षेत्रों को शामिल करने के लिए इसका विस्तार किया गया। फ्…

टैली के लाभ

टैली  के निम्न लिखित लाभ है ।


टैली को आप लगभग सभी भारती भाषाओँ में चला सकते हो । ऐसे चलना बहुत ही सरल है । एक दसवी पास बच्चा भी ऐसे चला सकता है । इस में हर तरह के व्यापार के खतों को रखा जा सकता है । इसमें किसी भी किस्म की गलती को आसानी से सुधरा जा सकता है । इसमें बैलेंस शीट व् लाभ हानि खाता अपने आप बन जाता है । आप को तो सिर्फ वाउचर एंट्रीज़ ही पास करनी है । 




एकाउटिंग ज्ञान -3

पिछले बलाग में हमने सिखा के कैसे –कैसे नियम एकाउटिंग में होते है । इस पाठ मों हम सिखेगे कि वोचर को देख कर कैसे एनटरी जरनल में पास की जाती है ।

मान लिजिए के शाम ने 100000 रुपये से अपना काम शुरु किया ।

तो इस वोचर में वयापार में 100000 नकद आए तो आने वाली वसतु को डैबिट किया जाएगा ।

कैश खाता डैबिट 100000 रुपये

पुंजी खाता करैडिट 100000 रुपये

एकाउटिंग ज्ञान

एकाउटिंग एक ऐसा विषय है जो हर किसी के लिए जरुरी है इस के बिना हमारा काम नहीं चल सकता । एकाउटिंग हमे हर काम को रिकारड करने का ज्ञान देती है । इस के बिना हम सही हिसाब किताब नहीं चल सकता ।

एकाउटिंग को सिखना बहुत ही आसान है । पर इस के लिए भी आप में सिखने की लगन होनी चाहिए । एकाउटिंग के कुछ नियमों को याद रखना भी जरुरी है । जो निमन पर्कार से है ।

1. लेने वाला हमेशा डैबिट होता है तथा देने वाला हमेशा करैडिट होता है ।

2. वियापार में जो कुछ भी आए डैबिट होता है जो कुछ भी जाए वह करैडिट होता है ।.

3. सभी खरचे डैबिट होते है तथा सभी आमदने करैडिट होती है ।