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अनमोल वचन,अनमोल सूत्र,अनमोल कहानियाँ,अनमोल दोहे,अनमोल शलोक

सब से पहले हमे यह जानना है कि अनमोल वचन,अनमोल सूत्र,अनमोल कहानियाँ,अनमोल दोहे,अनमोल श्लोकों का हमारे जीवन में क्या-क्या महत्त्व है,इन को क्यों पढ़ा जाए, इन को क्यों सुना जाये, इन को क्यों देखा जाए तो आइए ! कुछ चर्चा, कुछ विश्लेषण करते हैं हमारे जीवन में कितने उतार-चड़ाव आते है, कितने ही सुख-दुःख आते हैं, कितनी ही चिंताएँ-गम आते हैं, कितनी लाभ-हानि होती है, कभी-कभी इतने मुसीबतों से घिर जाते है कि कुछ भी नहीं सूझता कि क्या करें ? तो हमें उन महान पुरुषों का ध्यान आता है,जिन्होंने अपने जीवन में उन मुशिकलों का सामना कितनी बार किया । पहाड़ जैसी लगने वाली कठिनाईयों का डट कर मुकाबला किया । आपको उन महां-पुरुषों के जहां अनमोल वचन पढ़ने को मिलेंगे वहीं पर उनके जीवन की कुछ-क़ुछ झलकियाँ भी  देखने को मिलेंगी ।  आइये पहले अनमोल वचन देखते हैं,पढ़ते हैं, और उन अनमोल वचनों का अनुसरण करते हैं :---------------------- । 

शिक्षादायक अनमोल वचन
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चिराग खुद नहीं जलते जलाये जाते हैं । 
जिंदगी खुद नहीं बनती बनाई जाती है ।
मुबारिक हैं वह लोग जो अपनी नेक तदबीर उस वक़्त भी जारी रखते हैं जब जमाना उन का मजाक उड़ा रहा होता है । बड़ों की सोबत में बैठने से अदब व अक्ल आती है ।  
सबसे बड़ा बहादुर बदला न लेने वाला है । 
सबसे अच्छी खैरात माफ़ कर देना है । 
सबसे अच्छा नशा खिदमते खलक है । 
मर्द की खूबसूरती उसकी सफाहत से है । 
तनावों से दरजा बुलन्द होता है । 
खैरात से माल में कमी नहीं आती । 
तदबीर जैसी कोई दानाई नहीं । 
दौलत से जेवर खरीद सकते हैं हुस्न नहीं ।
दौलत से खुशामद खरीदी जा सकती है मुहब्बत नहीं । 
दौलत से गद्दे खरीद सकते हैं नींद नहीं । 
दौलत से लड़का-लड़की खरीद सकते हैं बेटा-बेटी नहीं । 
दौलत से किताबें खरीद सकते हैं इल्म नहीं । 
दौलत से दवाई खरीद सकते है सेहत नहीं ।
दौलत से कोई वस्तु खरीद सकते हैं वक़्त नहीं । 
दौलत से जिस्मानी राहत खरीद सकते हैं रूहानी मुसर्रत नहीं । 
दौलत से ऐनक खरीद सकते हैं आँख नहीं । 
दौलत से नारी खरीद सकते हैं पत्त्नी नहीं ।
दौलत से बेईमान खरीद सकते हैं ईमानदार नहीं । 
दौलत से पानी खरीद सकते हैं प्यास नहीं ।  
दौलत से भोजन खरीद सकते हैं भूख नहीं । 
दौलत से ज़मीन खरीद सकते हैं आसमान नहीं ।
दौलत इज्जत के मुकाबले हेच है । 
शौकत हिम्मत के मुकाबले हेच है । 
सल्तनत इबादत के मुकाबले हेच है ।
सूरत सीरत के मुकाबले हेच है । 
शुजावत सखावत के मुकाबले हेच है ।    


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प्यारे बी. काम के विद्यार्थयों, 

हम आप को निशुल्क बी. काम की शिक्षा नोट्स के माद्यम से देना चाहते है |  हमने आप के लिए पिछले पांच वर्षों में इस शिक्षा को आसान करने के लिए पर्यास किया है | उमीद है के निम्न दिए गए नोट्स को आप पडेगें | धन्यवाद 

शिक्षण क्या है |

इंग्लिश में शिक्षण को टीचिंग कहते है । जब एक गुरु अपने विद्यार्थी को ज्ञान देता है तो इसे ही शिक्षण कहा जाता है । प्राचीन कल से ही ऋषि मुनि शिक्षण का कार्य कर रहे है ।

१. सबसे पहले वे विद्यार्थों को अपना चरित्र सुधरने की शिक्षा देते है तथा कहते है हे प्रिये विद्यार्थों कभी भी अपना चरित्र मत खत्म करो । एक बार धन खत्म हो जाये तो फिर आ जाये गा , एक भार स्वास्थ्य चला जाये तो फिर आ जाये गा पर चरित्र  का विनाश हो  जाने से तो दुर्गति हि दुर्गति होती है । इस को सभालने के लिए रूप , शब्द, गंध , स्पर्श आदि मथुनों से रोका जाता है ।

२. चरित्र की शिक्षा  देने के बाद गुरु विद्यार्थी को अक्षर ज्ञान देता है । उसे संस्कृत , हिंदी , गणित , इतिहास , भूगोल तथा विज्ञानं की शिक्षा दी जाती है

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