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निर्णय के लिए प्रासंगिक लागत

निर्णय लेने के लिए प्रासंगिक लागत वह होती है  जिसे हम  लागत का भुगतान करने के लिए पहली वरीयता देते हैं ।  यह  लागत लेखांकन की अद्भुत उपकरण में से एक है। इस का मतलब है कि  हम सबसे ज्यादा लाभ प्राप्त करने के लिए केवल न्यूनतम कीमत चुकानी चाहिए ।  इसका मतलब  यह भी है हमे  सब अप्रासंगिक या गैर प्रासंगिक लागत छोड़ देनी चाहिए ।


उदाहरण के लिए, यदि आप अपने रुपये से  रिक्त रजिस्टर खरीद रहे हैं। मान लीजिये आप अ व्यापारी  से २० वाली सेल वाला रजिस्टर १४ रुपये का खरीदते हो ।  बाद में आप को पता लगता है कि  ऐसी तरह का तो सी व्यापारी १२ रूपये लगत पर दे रहा है । तो आप को १२ रूपये वाला रजिस्टर ही खरीदना चाहिए । मुझे लगता है कि  आप इस को समझ गए होंगे ।




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१. सबसे पहले वे विद्यार्थों को अपना चरित्र सुधरने की शिक्षा देते है तथा कहते है हे प्रिये विद्यार्थों कभी भी अपना चरित्र मत खत्म करो । एक बार धन खत्म हो जाये तो फिर आ जाये गा , एक भार स्वास्थ्य चला जाये तो फिर आ जाये गा पर चरित्र  का विनाश हो  जाने से तो दुर्गति हि दुर्गति होती है । इस को सभालने के लिए रूप , शब्द, गंध , स्पर्श आदि मथुनों से रोका जाता है ।

२. चरित्र की शिक्षा  देने के बाद गुरु विद्यार्थी को अक्षर ज्ञान देता है । उसे संस्कृत , हिंदी , गणित , इतिहास , भूगोल तथा विज्ञानं की शिक्षा दी जाती है

३. उपरोक्त शिक्षा देने के लिए कक्षा एक से दस होती है । दस वर्ष तक गुरु शिष्य को अपने पास रखता है । गुरु उसके हरेक कार्य पर नजर रखता है ।

शिक्षण से अद्यापक विद्यार्थी की आंखे खोल देता है । अगर मेरे अद्यापक ने मुझे हिंदी न सिखाई होती तो मै आज  शिक्षण क्या है न लिख सकता । इस लिए शिक्षण के पेशे को सबसे अच्छा माना गया है क…

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प्यारे बी. काम के विद्यार्थयों, 

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