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लेखांकन प्रक्रिया आउटसोर्सिंग

अब, वाणिज्य छात्र की किस्मत चमक जाएगी प्रिय दोस्तों, वाणिज्य के छात्रों के लिए एक अच्छी खबर है! अब, वाणिज्य के छात्रों के दिनों बदल जाएगा. अब, वाणिज्य स्नातक पूरा समय लेखाकार नौकरियों में खर्च करने की ज़रूरत नहीं होगी. समय ऑनलाइन खातों बनाने के लिए एयर कंडीशनर कमरे में आ गया है |


सिर्फ अवसर पर आक्रमण करने की आवश्यकता है. हाँ, A.P.O. के B.P.O., अब बूम के बाद आ रही है. A.P.O. लेखांकन प्रक्रिया आउटसोर्सिंग का मतलब है. A.P.O. B.P.O. के नए और विकसित रूप है अनुसंधान रिपोर्टें, A.P.O. के अनुसार बहुत fastly. This उद्योग  बढ़ रहा है 60% वार्षिक दर से बढ़ कूद पड़ा है. इस उद्योग रुपये की 60 करोड़ रुपए तक पहुँच गया है. वहाँ लेखांकन के कई कारण आउटसोर्सिंग कर रहे हैं |


1. हर साल 3 लाख छात्र कॉमर्स की डिग्री के साथ बाहर आते है । .

2.  अब भारतीयों अंग्रेज़ी भाषा में विशेषज्ञ हैं.

3.    IFRS के सभी मानक अपनाना होगा. क्योंकि सभी नियमों और अमरीका के लेखांकन के नियम और ब्रिटेन भारतीय लेखा नियमों और विनियमों के बराबर हैं.

4.   संयुक्त राज्य अमेरिका के स्वतंत्र लेखाकार की फीस बढ़ाने से. भारतीय वाणिज्य छात्रों के लिए तो, वहाँ अच्छे अवसर हैं. अब ब्रिटेन रहने के लिए अनुमति दी गई है | भारतीय एकाउंटेंट को  काम करने के लिए.

 विदेशी कंपनी से लेखांकन आउटसोर्स अनुबंध प्राप्त करने के लिए आवश्यक योग्यता

: -- किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से

क ) वाणिज्य स्नातक की डिग्री. कंप्यूटर और कंप्यूटर लेखा और लेखा सॉफ्टवेयर में विशेषज्ञ.
ख )  लेखन में कार्यकुशलता

ग )  व्यावसायिक अंग्रेज़ी के बोल. इंटरनेट खोज और E-mail संगठन में विशेषज्ञ. अंतरराष्ट्रीय कानूनों का ज्ञान. अगर आप अच्छी तरह से योग्य हैं तो आज ही लेखांकन प्रक्रिया आउटसोर्सिंग में अपना करियर बनाये । 

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इंग्लिश में शिक्षण को टीचिंग कहते है । जब एक गुरु अपने विद्यार्थी को ज्ञान देता है तो इसे ही शिक्षण कहा जाता है । प्राचीन कल से ही ऋषि मुनि शिक्षण का कार्य कर रहे है ।

१. सबसे पहले वे विद्यार्थों को अपना चरित्र सुधरने की शिक्षा देते है तथा कहते है हे प्रिये विद्यार्थों कभी भी अपना चरित्र मत खत्म करो । एक बार धन खत्म हो जाये तो फिर आ जाये गा , एक भार स्वास्थ्य चला जाये तो फिर आ जाये गा पर चरित्र  का विनाश हो  जाने से तो दुर्गति हि दुर्गति होती है । इस को सभालने के लिए रूप , शब्द, गंध , स्पर्श आदि मथुनों से रोका जाता है ।

२. चरित्र की शिक्षा  देने के बाद गुरु विद्यार्थी को अक्षर ज्ञान देता है । उसे संस्कृत , हिंदी , गणित , इतिहास , भूगोल तथा विज्ञानं की शिक्षा दी जाती है

३. उपरोक्त शिक्षा देने के लिए कक्षा एक से दस होती है । दस वर्ष तक गुरु शिष्य को अपने पास रखता है । गुरु उसके हरेक कार्य पर नजर रखता है ।

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