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100 बातें जो मैंने लेखाँकन शिक्षा से सिखी

वर्ष 1996 मेँ पहिली बार मैने लेखाँकन शिक्षा के लिए 10+1 मेँ कोमरस ली थी इस कक्षा मेँ मैने लेखाँकन के विषय मेँ मुलभुत बाते सिखी तथा वही मुझे अपने कमरस मेँ पोसटगरैजुएशन करते समय भी काम आई । आज मुझे इस क्षेत्र मेँ कार्य करते हुए तकरीबन 12 वर्ष हो चुके है कयोँकि लेखाँकन मेरा अपनी कमरस शिक्षा मे प्रीय विषय रहा है तथा इस लिए मैँ इसी क्षेत्र मेँ ही कार्य़ भी किया है । इस शिक्षा से मैने बहुत कुछ सिखा है तथा वही आज 100 बाते जो मैँने लेखाँकन शिक्षा से सिखी के रुप मेँ आप को बता रहा हुँ ।


1. लेखाँकन शिक्षा से मैंने अपना निजी हिसाब किताब रखा जा सकता है यह सिखा ।
2. हर कार्य को करते समय हिसाब लगाने की आदत भी इसी शिक्षा के कारण आइ ओर इसी ने मेरे निजी फालतु खरचो को कम करने मेँ भी सहायता की ।
3. इस शिक्षा से कपनी की कार्य क्षमता को कैसे माप सकते है का भी ज्ञान हुआ
4. कहा कहा लेखाकार लेखा मेँ घपला कर सकते है यह भी पता लगा ।
5. दसवी कक्षा तक की हुई गणित की शिक्षा का वयापार मेँ कैसे इसतमाल किया जाता है यह भी जानने में अंनद आया ।
6. कालेज के समय जब बैलेसशीट नहीँ मिलती थी तो मैँ पुरी कोशिश करके कोई कोई एसा रासता निकाल लेता था जिस से बैलेसशीट मिल ही जाती थी इस दिमागी कसरत से जहाँ लखाँकन मुझे ओर अधिक अछा लगने लगा वही समय भी अछा बितता था ।
7. गलतीयोँ को सुधारना ।
8. लागत को कम करना
9. रिपोटो पर टिपणी करनी ।
10. खातो की जाच करनी । एक बार मै जब एक सी. ए के पास आडटिँग सिख रहा था तो जब हम एक सकूल मेँ खातो को जाचने गए तो मैने जाते ही लेखाकार की 10 लेखाँकन गलती जो कि ऐनटरी तथा परोविडैँट गोरमैँट खाते मेँ जमाँ कराने के सबँध मेँ थी अपने सिए को दिखाइ तो लेखाकार का चहरा मानो पसीने पसीने हो गया तब मुझे शायिद इस क्षेत्र मेँ कार्य करने की जिमेवारी का अहसास हुआ ।
11. मुशकल का सामना करना ।
12. भगवान पर विशवास रखना तथा गलत काम को करने से डरना कि सब से बडा लेखाकर भी चोबिस घँटे हमारे किए हुए एक एक कार्य का हिसाब रख रहा है तथा उस कि नजर से हम बच नही सकते ।
13. अछी योजना को बनाना
14. समय समय पर किए कार्य का मुलाकन करना
15. अपनी जिमेवारी को समझना ।
16. खातो को बनाते हुए एसा लगना कि मैँ दुनिया का सब से जरुरी काम कर रहा हुँ ।
17. शाँत रहना
18. गहराई से सोचना
19. इस गलतफहमी मेँ न रहना कि छोटी गलती ही तो है फिर कया हुआ । पर लेखाकन मेँ हर छोटी गलती चाहे 1 पैसे की हो चाहे 1 कडोर की बराबर मानी जाती है ।
20. एक से जयादा कताबो को पढना । वह भी सिर्फ अपनी लेखाकन समसया को हल करने के लिए ।
21. जो लेखाकन समसया हल न हो सकी उस को जीवन मेँ परैकटल कर के हल करने कि कोशिश करनी ।
22. वास्तु को मापने तथा उस की कीमत को निर्थारित करना सिखा
23. अलग अलग खातों को जाना
24. खातों की विशेषतॉओ को जाना
25. एकाग्रता
26. ऐnजीओ की पहिचान सिर्फ उस के खातों की पारदशिता से की जा सकती है
27. ‍‌क्यों , कैसे , किस तरहा के बारे जाना
28. जीवन के सफल होने के बहुत रस्ते जाने
29. जिस में आज हर वियक्ति रूचि रखता है उस की शिक्षा देना
30. हिसाब किताब रखना उतना ही जरुरी जितना व्यापर करना
31. लेखांकन रिपोर्ट मार्केटिंग का कार्य भी करती है
32. लाभ होने के बाद भी व्यापर फेल क्यों होते है
33. विंडो दरेस्सिनग क्या है
34. व्यापर को एकुइटी पर कैसे चलाया जा सकता है
35. अच्छी सम्पति को कसे खरीदना है
36. व्यापार को ओवर गय्रिंग तथा अंडर गयारिंग से कैसे बचाना है
37. निवेश पर परपति काया है तथा यह कैसे प्राप्त हो सकती है
38. तुलना करना
39. कारण तथा उस के परभाव को जानना
40. साधनों का सब से अच्छा पर्योग करना
41. कपनी के लाभ , रिसेर्वे , डिविडेंट तथा टैक्स में डविसन करना
42. खाते बनाना भी एक सेवा है
43. धोके के सबंध मैं सुराख़ निकलने
44. समय पर कार्य को पूरा करना
45. सामाजिक लाखाकन बनाते हुए सामाजिक नटवर्किंग का ज्ञान
46. कर को घटाने की तकनीके सीखना
47. आय के पुनर निवेश पर आय का विश्लेषण करना
48. वित् सबंधी ज्ञान मैं बरोत्री
49. लेखांकन शिक्षा से शिक्षा के मनोविज्ञान की तरफ कदम
50. खातों में अडजस्ट करते करते जीवन मैं अडजस्ट करना
51. जयादा देर तक बाठना
52. जीवन मैं परक्तिकल होना
53. कार्य को स्टेप विसे करना
54. ब्लॉग्गिंग करना
55. ऑन लायन् के रीडर की समस्या को हल करना
56. लेख लिखना
57. धन कमाना
58. महनत करनी
59. सबंध स्थापित करना
60. कपनी की नब्ज को पकड़नॉ
61. अनुशासन
62. चालू पूंजी तथा सथिर पूंजी को जीवन के सबंध मैं समजना
63. लापरवाही से घर्णॉ करना
64. गलती ठीक होने पर खुश होना
65. पपरो मैं मुशकल सवालों को पहले हल करना
66. डबल चक करना
67. खुद को पचानना
68. खुद अपने पारो पर खरा होना
69. गे़प जो मुजे ही मुशकल लगते थे तथा मैंने ही आसान किये
70. से ए भी गलती करते है
71. गूगल से दोस्ती
72. टैली से दोस्ती
73. दुनिया से दोस्ती
74. अपने नाम के आगे प्रोफेस्सर लगाना
75. एकॉंटिंग शिक्षा के विडियो बनाना
76. भारतीय कानूनों को अद्ययन करना
77. विद्यारिथियो के करियर बनाने मैं सहयोग देना
78. जो नहीं सिखा वह भी सीख लिया
79. दुनिया का कोई भी लेखाकार लेखे मैं पूर्ण नहीं है
80. इतिहास की सूचने महत्व पूर्ण होती है
81. सिर्फ खाते बनाने की बजाये कुछ नया करना
82. हर सवाल को हल करने के सबंध मैं तर्क देना
83. जवाब देने वाला बनाना
84. खोजबीन करना
85. ओर लेखाकारो से शिक्षा लीना
86. कम्पुटर सीखना
87. दोरॉही
88. एस ने सिर्फ मेरे लिए नए दरवाजे ही नहीं खोले बलके मुझे एन दरवाजो में जाने का विचार भी दिया .
89. लेखाकार के लिए संभव है के वह मुझे दन्यवाद करे जब में अगले दिन अपना ईमेल अकाउंट चेक करू
90. ट्रबल शूटर बनना
91. अपनी हिंदी सुधारना जो मेरी परथम भाषा है
92. लेखाविधि शिक्षा ने मुझे अन्य देशो में हिसाब किताब केसे रखा जाता है के सबंद में मुलभुत बाते सिखाई
93. कंप्यूटर लेखाविदी मनुअल लेखा विधि से आसान है
94. अक्सेच्ल में कम करन अच्छा लगता है
95. यू के की भी लेखाविधि के समस्या हल की
96. निवेश , मल्टी करंसी सबंधी समस्या हल करने में महार्थ
97. बहुत कुछ नया सिखने की लालसा
98. लेखांकन शिक्षा ही सबसे अच्छी शिक्षा है
99. यदि सभी एकाउंटेंट के अनुभाव को किताब पर लिख दिया जाए तो हो सकता उस से हजारों एसी लेखाविदी की समस्याए सुल्ज जाए जो अभी तक नहीं सुल्जी , तथा यह अपने आप में प्रक्टिकल लेखाविधि का रूप ले ले
100. लेखाविधि शिक्षा एक ऐसा ज्ञान का भंडार है जिसे सिखने से ही मनो सभी कुछ जैसे गणित , अर्थशास्त्र , व्यापारिक ज्ञान , पर्बंद , सक्याकी , कंपनी अधिनयम , शिक्षा , तकनोलोजी तथा समाजशास्त्र का भी ज्ञान कुछ कुछ हो ही जाता है क्योकि यह शिक्षा का अन्य सिक्षाओ से बहुत गहरा तालमेल है

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