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आधयपकों के चरित्र को कैसे सुधारे

आज मैं जब सुबह खबरें पढ रहा था तो आचनक ही मेरी नजर एक ऐसी खबर पर पढी जिस को सुन कर मुझे बहुत निराशा हुइ वह थी आधयपकों के चरित्र के विनाश की खबर ।
तो मेरा आज काफी समय के बाद दिल किया कि इस विषय पर लिखा जाए कि हम कैसे आधयपकों के चरित्र को सुधार सकते है
  1. सब से आसान तरीका है कि आधयपकों को सवम ही आतम चीनतन करना चहिए कि उन का कारय ज्ञान देना है ना कि गलत काम करना
  2. आधयापक को लगाने से पहले चरित्र की भी जांच करनी चाहिए ।

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१. सबसे पहले वे विद्यार्थों को अपना चरित्र सुधरने की शिक्षा देते है तथा कहते है हे प्रिये विद्यार्थों कभी भी अपना चरित्र मत खत्म करो । एक बार धन खत्म हो जाये तो फिर आ जाये गा , एक भार स्वास्थ्य चला जाये तो फिर आ जाये गा पर चरित्र  का विनाश हो  जाने से तो दुर्गति हि दुर्गति होती है । इस को सभालने के लिए रूप , शब्द, गंध , स्पर्श आदि मथुनों से रोका जाता है ।

२. चरित्र की शिक्षा  देने के बाद गुरु विद्यार्थी को अक्षर ज्ञान देता है । उसे संस्कृत , हिंदी , गणित , इतिहास , भूगोल तथा विज्ञानं की शिक्षा दी जाती है

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